जे के बत्ता, न्यू चण्डीगढ़
Nari Shakti Vandan Adhiniyam
चंडीगढ़: स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन द्वारा आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। Nari Shakti Vandan Adhiniyam इस दौरान फाउंडेशन की प्रमुख सदस्य नीलू तिवारी (रिटायर्ड प्रोफेसर), मनविंदर बाजवा (पूर्व वाइस प्रिंसिपल), रंजू ऐरी (रिटायर्ड सीनियर संपादक) और डॉ. रोजी धवन अरोड़ा (MDS) ने मीडिया को संबोधित करते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ के महत्व पर प्रकाश डाला।
लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी
Nari Shakti Vandan Adhiniyam वक्ताओं ने इस अधिनियम को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस आरक्षण में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल हैं, जो समावेशी विकास को बल देंगे।

नेतृत्व से समाज और अर्थव्यवस्था को लाभ
Nari Shakti Vandan Adhiniyam प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने वाली भूमिका में आती हैं, तो समाज में संतुलन बढ़ता है और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है। फाउंडेशन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।
26 साल का लंबा इंतज़ार हुआ खत्म
प्रेस वार्ता में यह भी याद दिलाया गया कि 26 साल पहले जब यह बिल पेश किया गया था, तो कई राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मांग को पूरा कर केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण को देश की मुख्यधारा से जोड़ा है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “सुकन्या समृद्धि योजना” जैसी योजनाओं ने इस बदलाव की ठोस नींव रखी है।

अंत में स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन ने दोहराया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा। यह महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त कर देश के भविष्य को और अधिक उज्ज्वल और समावेशी बनाएगा।चंडीगढ़: Nari Shakti Vandan Adhiniyam स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन द्वारा आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरा न फाउंडेशन की प्रमुख सदस्य नीलू तिवारी (रिटायर्ड प्रोफेसर), मनविंदर बाजवा (पूर्व वाइस प्रिंसिपल), रंजू ऐरी (रिटायर्ड सीनियर संपादक) और डॉ. रोजी धवन अरोड़ा (MDS) ने मीडिया को संबोधित करते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ के महत्व पर प्रकाश डाला।
लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी
Nari Shakti Vandan Adhiniyam वक्ताओं ने इस अधिनियम को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस आरक्षण में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान शामिल हैं, जो समावेशी विकास को बल देंगे।
नेतृत्व से समाज और अर्थव्यवस्था को लाभ
प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने वाली भूमिका में आती हैं, तो समाज में संतुलन बढ़ता है और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है। Nari Shakti Vandan Adhiniyam फाउंडेशन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।
26 साल का लंबा इंतज़ार हुआ खत्म
Nari Shakti Vandan Adhiniyam प्रेस वार्ता में यह भी याद दिलाया गया कि 26 साल पहले जब यह बिल पेश किया गया था, तो कई राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मांग को पूरा कर केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण को देश की मुख्यधारा से जोड़ा है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “सुकन्या समृद्धि योजना” जैसी योजनाओं ने इस बदलाव की ठोस नींव रखी है।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam अंत में स्त्री सामर्थ्य फाउंडेशन ने दोहराया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा। यह महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त कर देश के भविष्य को और अधिक उज्ज्वल और समावेशी बनाएगा।
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