चंडीगढ़: (Haryana News) केंद्र सरकार ने हरियाणा के राइस मिलरों को बड़ी राहत देते हुए उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को मान लिया है। अब मिलरों को चावल की सप्लाई के दौरान उसमें 1% फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) मिलाने की अनिवार्यता से छूट मिल गई है। इस फैसले से चावल उद्योग में आ रही तकनीकी और आर्थिक परेशानियों के कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों हो रही थी मांग?
हरियाणा राइस (Haryana News) मिलर एसोसिएशन काफी समय से केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से इस नियम को हटाने की मांग कर रहा था। मिलरों का कहना था कि कई छोटी मिलों के पास FRK मिलाने के लिए जरूरी मशीनें नहीं हैं। (Haryana News) इसके अलावा, FRK मिलाने से प्रति क्विंटल चावल की लागत बढ़ रही थी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
साथ ही, कई बार FRK मिलाने के बावजूद सैंपल फेल हो जाते थे, जिसके कारण मिलरों पर जुर्माना भी लगाया जाता था।

मिलरों में खुशी
केंद्र के इस फैसले के बाद राइस मिलरों में खुशी का माहौल है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस शर्त के कारण बड़ी मात्रा में चावल की डिलीवरी अटकी हुई थी। अब चावल समय पर एफसीआई के गोदामों तक पहुंच सकेगा और (Haryana News) मिलरों पर पड़ने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा।
क्या है FRK?
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) ऐसा चावल होता है, जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए इसे अनिवार्य किया था, लेकिन अब व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए इसमें ढील दी गई है।
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