न्यू- चंडीगढ़,24 मार्च 2026 आवाज इंडिया टुडे
शहीद भगत सिंह की मूर्ति स्थापना
जे के बत्ता: (शहीदी दिवस) नयागांव में हर साल 23 मार्च के दिन शहीद दिवस मनाया जाता है । नयागांव-मुल्लांपुर-माजरी प्रेस कल्ब के प्रधान जे के बत्ता, चिरंजीव राजू वर्मा , सतनाम सिंह सिसवां ,रविन्द्र भाटिया, अतुल अरोरा,सतनाम सिंह सत्तू, रविन्द्र वाजिदपुर ,दिलबर सिंह खैरपुर ,गुरप्रीत सिंह सुमन मुल्लांपुर, आदि प्रैस कल्ब के सदस्यों द्वारा नगर काउंसिल के दफ्तर के सामने शहीद भगत सिंह की मूर्ति स्थापित की गई है तथा उस चौराहे का नाम भी शहीद भगत सिंह चौक रखा गया है ,जिसका उद्घाटन पंजाब की पूर्व कैबिनेट मंत्री अनमोल गगन (शहीदी दिवस) मान द्वारा किया था ।
नयागांव-मुल्लांपुर-माजरी प्रेस क्लब के संस्थापक व प्रधान जे के बत्ता ने बताया कि देश के इतिहास में आज का दिन बेहद अहम (शहीदी दिवस) है। आज शहीदों के सम्मान और उनके बलिदान की याद में शहीद दिवस मनाया जा रहा है। मंच का संचालन श्री अतुल अरोरा ने बखूबी निभाया । उन्होने बताया कि मुख्य मेहमान पंजाब भाजपा के लीगल सेल के कनविनर एडवोकेट एन के वर्मा के (शहीदी दिवस) पहुंचने पर प्रेस कल्ब के सदस्यों द्वारा उनको पुष्प गुलदस्ता भेंट करके (शहीदी दिवस) उनको सिरोपा डाल कर उनका स्वागत किया गया ।

एडवोकेट एन के वर्मा ने शहीद भगत सिंह की मूर्ति पर भेंट की पुष्प माला
एडवोकेट एन के वर्मा ने शहीद भगत सिंह की मूर्ति पर पुष्प भेंट कर श्रद्धांजलि देते हुए पुष्प माला अर्पण की । (शहीदी दिवस) एडवोकेट एन के वर्मा ने अपने भाषण में कहा कि यह दिन हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है। सन 1931 में आज ही के दिन अंग्रेजों ने भारत के युवा स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को फांसी पर लटकाया गया था तब उन्होने कहा था कि जिंदा रहने की हसरत मेरी भी है…पर मैं कैद रहकर अपना जीवन नहीं बिताना चाहता। (शहीदी दिवस) ये विचार क्रांतिकारी भगत सिंह के हैं और शहीद दिवस पर हम सब उन्हें और उनके साथियों को याद करेंगे ।
शहीद दिवस हर वर्ष 23 मार्च को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 1931 में इसी दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दी थी । देश में तीनों वीर सपूतों का बलिदान प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जाता है । इसके बाद दुसरे मेहमान पंजाब भाजपा के खजांची सुखविंदर सिंह गोल्डी पहूंचे थे उनको भी प्रेस कल्ब के सदस्यों द्वारा पुष्प गुलदस्ता भेंट करके सिरोपा डाल कर उनका स्वागत किया । उन्होने भी शहीद भगत सिंह की मूर्ति पर पुष्प भेंट करके पुष्प माला पहना कर श्रध्दसुमन भेंट किया ।

वंदे मातरम के लगाए गए नारे
गोल्डी ने अपने भाषण में कहा कि स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को फांसी पर लटकाया गया था । उन्होंने आजादी की लड़ाई में हंसते-हंसते अपनी जान कुर्बान करने वाले अमर शहीदों की श्रद्धांजलि में यह 95वें वा दिन मनाया गया है। भारत में शहीद दिवस एक नहीं, बल्कि दो बार मनाया जाता है। पहला शहीद दिवस 30 जनवरी को बापू यानी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है, जबकि साल का दूसरा शहीदी दिवस हर साल 23 मार्च भारत के वीर सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को समर्पित है।
देश भक्त नन्हे बालक त्रिप्त पाल सिंह सिध्दू द्वारा भगत सिंह व शहीदों को अर्पित एक देश भक्ति के दो गाने गाये जिसे सुनकर सभी की आँखे नम हो गई तब सभी ने वंदे मातरम के नारे लगाए ।
नन्ही बेटी ने गाया मेरा रंग दे बसंती चोला….
इसके बाद मुस्लिम समुदाय के मोहम्मद सोयेब और अफसाना की बेटी नन्ही बेटी आलीजा जो अपनी बुआ नाजिया के साथ जिदद करके शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंची थी ने मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे गा कर सबका मन मोह लिया उसके दादा शकील और दादी अब्बासिया ने बताया कि हमारी गुडिया आलिजा शहीद भगत सिंह की बहुत बड़ी फैन है तथा हमेशा देश भक्ती के गीत गाती रहती है । इस मौके पर श्री नीलकण्ठ महादेव सेवा समिति रजिस्टर के उमेश गुप्ता,राम गोपाल ठाकुर ,चन्द्र प्रकाश,जसबीर सिंह,पंच राम ,राजेश गुप्ता,तथा प्रेम बंसल द्वारा चाये की सेव निभाई तथा श्रध्दा सुमन भी भेंट किये ।

भाजपा के नरेश कुमार ,पार्षद प्रमोद कुमार, समाजसेवी हरप्रीत सिंह सिद्धू, समाजसेवी नरेश कुमार ,मोनू तथा मनोज कुमार विशेष तौर पर अपने 500 साथियों के साथ पहुंचे, यातायात पुलिस के ऐ एस आई सरदार जागीर सिंह ,पी सी आर के एएसआई निर्भय सिंह , कासल सरकारी स्कूल के मुख्य अध्यापक ऐन डी तिवारी, मारकेट कमेटी के प्रधान उमेश गुल्यानी व अन्य ने पुष्प भेंट करते हुऐ कहा कि शहीदी दिवस का इतिहास और शहीद भगत सिंह के कुछ अनमोल विचारों के बारे में उनके पदचिन्हों पर चलना चाहिए । वहां सारा दिन देश भक्ति के गीत चलते रहे ।
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