Shaheed Diwas 2026: शहीद दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत की आज़ादी आसान नहीं थी, बल्कि यह बलिदान, साहस और (भगत सिंह) संघर्ष से हासिल की गई थी। आज़ादी की लड़ाई में हजारों नौजवानों ने अपने दम पर अंग्रेजों से टक्कर ली और देश को आज़ाद कराने का संकल्प लिया।
भारत में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करने का दिन है। इसी दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। यह दिन हमें उनके साहस को सलाम करने और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

Shaheed Diwas 2026
Shaheed Diwas 2026
भगत सिंह का जोश और जज़्बा
“दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत…” जैसी पंक्तियां भगत सिंह के जज़्बे को दिखाती हैं। उन्होंने युवाओं के दिलों में देशभक्ति की ऐसी आग जगाई कि अंग्रेजी हुकूमत भी उनसे डरने लगी। उन्होंने डरने के बजाय लड़ने का रास्ता चुना और पूरी ताकत के साथ आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े।
जेल में भी जारी रही क्रांति
भगत सिंह लगभग दो साल तक जेल में रहे। इस दौरान उन्होंने कई लेख लिखे और अपने विचारों से लोगों को प्रेरित करते रहे। उनके साथ इस संघर्ष में राजगुरु और सुखदेव भी थे। ये तीनों ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ जैसे क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े थे और देश के लिए जीने-मरने को तैयार थे।

लाहौर जेल में दी शहादत
23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में इन तीनों वीरों को फांसी दे दी गई। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका मानना था कि यह समय बलिदान का है और उनके इस बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा।
दो बार मनाया जाता है शहीद दिवस
भारत में शहीद दिवस साल में दो बार मनाया जाता है—30 जनवरी और 23 मार्च। 30 जनवरी को महात्मा गांधी को याद किया जाता है, जबकि 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत को नमन किया जाता है।

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