(नवरात्रि का छठा दिन) नवरात्रि का छठवां दिन अत्यंत अद्भुत और शक्तिशाली है, क्योंकि इस दिन हम माँ कात्यायनी की पूजा करते हैं। योग साधना में यह वह पड़ाव है जहाँ साधक भौतिक (नवरात्रि का छठा दिन) जगत से ऊपर उठकर दिव्य दृष्टि प्राप्त करने के करीब पहुँचता है।
माँ कात्यायनी: नाम और स्वरूप
नाम का कारण: महर्षि कात्यायन ने कठिन तपस्या कर भगवती को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त किया था। चूँकि वे कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन की पुत्री बनीं, इसलिए (नवरात्रि का छठा दिन) इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा।
स्वरूप: माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और ज्योतिर्मय है। (नवरात्रि का छठा दिन) इनकी चार भुजाएँ हैं। दाहिने हाथ वरद और अभय मुद्रा में हैं, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।

महत्व: इन्होंने ही महिषासुर का वध किया था, इसलिए इन्हें ‘युद्ध की देवी’ और ‘अधर्म का नाश’ करने वाली माना (नवरात्रि का छठा दिन) जाता है।
आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) और माँ कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन की साधना का संबंध आज्ञा चक्र से है। (नवरात्रि का छठा दिन) यह सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में से एक है।
स्थान: यह दोनों भौहों के बीच (Forehead के मध्य) स्थित होता है।
तत्व: मन (Mind)
रंग: गहरा नीला या इंडिगो (Indigo)।
प्रतीक: दो पंखुड़ियों वाला कमल। (नवरात्रि का छठा दिन)
आज्ञा चक्र जागृत करने की संपूर्ण विधि
आज्ञा चक्र को जागृत करने का अर्थ है ‘तीसरी आँख’ का खुलना, जिससे अंतर्ज्ञान (Intuition) प्राप्त होता है।
मंत्र और स्पंदन (Mantra & Sound):
बीज मंत्र: इसका सर्वशक्तिमान मंत्र ‘ॐ’ (OM) है।
विधि: रीढ़ सीधी करके बैठें। अपना पूरा ध्यान भ्रूमध्य (दोनों भौहों के बीच) पर टिकाएं। गहरी सांस लें और ‘ओऽऽम्’ का लंबा और गूंजता हुआ उच्चारण करें।

स्पंदन: इस मंत्र की गूँज को अपने मस्तिष्क के केंद्र में महसूस करें। ऐसा महसूस करें जैसे माथे के बीच से प्रकाश की किरणें निकल रही हैं।
त्राटक क्रिया (Trataka):
आज्ञा चक्र के लिए ‘त्राटक’ सबसे प्रभावी है। एक दीपक की लौ या किसी बिंदु को बिना पलक झपकाए तब तक देखें जब तक आंखों से पानी न आने लगे। फिर आँखें बंद कर उस लौ को अपने भ्रूमध्य में देखने का प्रयास करें।
योग आसन:
शीर्षासन: यह मस्तिष्क में रक्त संचार और ऊर्जा को चरम पर ले जाता है।
बालासन (Child Pose): माथे को जमीन पर टिकाने से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है।
पूजा विधि, भोग और मंत्र
रंग: इस दिन शहद जैसा रंग (Honey/Golden) या लाल रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ है।
प्रिय भोग: माँ कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग लगाना सबसे प्रिय है। मान्यता है कि इससे साधक की सुंदरता और आकर्षण शक्ति बढ़ती है।

सिद्ध मंत्र:
“चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥”
अथवा: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥”
जीवन, चेतना और ‘श्री’ पर प्रभाव
चेतना: आज्ञा चक्र के सक्रिय होने से साधक की ‘छठी इंद्री’ (Sixth Sense) जाग जाती है। उसे भविष्य की घटनाओं का आभास होने लगता है और मानसिक स्पष्टता आती है।
जीवन: माँ कात्यायनी की पूजा से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं की पूजा की थी।
श्री (समृद्धि): यह चक्र जागृत होने पर व्यक्ति अपने विचारों से अपनी वास्तविकता बदलने की शक्ति रखता है, जिससे सफलता और ऐश्वर्य (श्री) खिंचा चला आता है।
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