पिंजौर,7 मार्च 2026 आवाज इंडिया टुडे
पूर्व सचिव ने मुख्यमन्त्री नायब सैनी को भेजा ज्ञापन
(सुनील दत्त ) शिवालिक विकास मंच प्रदेशाध्यक्ष एंव हरियाणा कांग्रेस पूर्व सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने मुख्यमन्त्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेजकर जिला पंचकूला के 113 गाँवो में लगी हरियाणा क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 7ए और पेरीफेरी एक्ट 1952 को हटाने की मांग की है। विजय बंसल ने ज्ञापन में कहा कि क्योंकि धारा 7ए लगने के कारण ग्रमीण और विशेषकर शहरी क्षेत्र में रहने वाले जमींदार और (पेरीफेरी एक्ट)अन्य लोग अपनी ही जमीन को ना तो बेच पा रहे हैं ना ही कोई व्यक्ति जमीन खरीद पा रहा है। क नहीं बन पा रहे हैं। नगर परिषद कालका पिंजौर में शामिल गांवों में नगर परिषद द्वारा मकान के नक्शे भी पास नहीं किए जा रहे है ना ही यहां पर कोई विकास कार्य हो पा रहा है। विजय बंसल ने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्र को अर्बन क्षेत्र घोषित किया जा चुका है तो उसमें शहरी विकास की धारा 7 ए लगाने का कोई महत्व ही नहीं रह जाता। यहां के जमींदारों और अन्य लोगों के पास बहुत थोड़ी-थोड़ी जमीन है लगभग सभी के पास एक एकड़ से कम जमीन उपलब्ध है क्योंकि यह अर्ध पहाड़ी क्षेत्र है।
विजय बंसल ने सरकार पर कसा तंज
विजय बंसल ने बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने कालका क्षेत्र को उद्योगिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र घोषित कर रखा है लेकिन पेरीफेरी एक्ट और धारा 7ए लागू होने के कारण यहां पर उद्योग धंधे लगाने की अनुमति ही नहीं मिल पाती। सरकारी अनदेखी के चलते विषेशकर कालका, पिंजौर क्षेत्र में विकास ही नहीं हो रहा है।

उन्होने बताया कि गत 25 नवंबर 2020 को हरियाणा हरियाणा सरकार की नगर तथा ग्राम आयोजन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर कालका विधानसभा क्षेत्र सहित पंचकूला के (पेरीफेरी एक्ट) कुल 212 गांवो में हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 7 ए लगा दी गई थी। हालांकि राजनीतिक प्रभाव के चलते दिनांक 3 मार्च 2021 को नगर ग्राम आयोजन विभाग द्वारा दूसरी अधिसूचना जारी कर लगभग 100 गांवो को 7ए की सूची से निकाल दिया था। कुल 113 गांवो में अभी भी धारा 7ए लागू हो रखी है जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जीरकपुर, मोहाली और डेराबस्सी जैसे गांव तेजी से हो रहे विकसित
विजय बंसल ने बताया कि हालांकि चंडीगढ़ के साथ लगते हुए पंजाब के जीरकपुर, मोहाली और डेराबस्सी जैसे गांव तेजी से विकसित होकर आज चंडीगढ़ शहर को मात दे रहे हैं जबकि वहां भी पेरीफेरी एक्ट लागू था। लेकिन सरकार, अधिकारियों एवं प्रशासन की बेरुखी की वजह से विशेषकर कालका विधानसभा क्षेत्र विकास के मामले में काफी पिछड़ चुका है।(पेरीफेरी एक्ट) जो विकास कालका क्षेत्र में होना चाहिए था वह सारा विकास जीरकपुर, मोहाली डेराबस्सी में हो रहा है क्योंकि पंजाब राज्य सरकार ने विकास के मध्य नजर वहां पर लगे हुए पेरीफेरी एक्ट को समाप्त कर उसे अर्बन एरिया घोषित कर तेजी से विकास किया है। लेकिन लगता है कालका विधानसभा क्षेत्र को देखने वाला कोई नहीं है।
पेरीफेरी एक्ट और धारा 7ए से पंचकूला क्षेत्र प्रभावित
उन्होने बताया कि गत 17 मार्च 2010 में हरियाणा सरकार ने पंचकूला नगर परिषद पिंजौर, कालका नगर पालिकाओं को भंग कर पिंजौर ब्लॉक की 27 पंचायतों सहित कुल 42 पंचायतों को मिलाकर नगर निगम घोषित कर दिया था। लेकिन सरकार ने पेरीफरी एक्ट में संशोशन कर पेरीफेरी एक्ट 1952 में ई धारा शामिल कर पूरे क्षेत्र के 154 गावों में इसे लागू कर दिया था। शिवालिक विकास मंच ने वर्ष 2012 में इसके विरुद्ध पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और हाईकोर्ट के (पेरीफेरी एक्ट) आदेशानुसार सरकार ने 102 गांवों से पेरीफेरी हटा दी लेकिन 52 गांवों में अभी भी लागू है।

विजय बंसल ने बताया कि इतना ही नहीं वर्ष 2021 में 49 गांवो से पेरीफेरी एक्ट हटाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसमें माननीय हाईकोर्ट ने सरकार को पेरीफेरी एक्ट हटाने के लिए कार्रवाई करने के आदेश दिए थे लेकिन उस पर भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। पेरीफेरी एक्ट और धारा 7 ए लगी होने के बावजूद भी पूरे क्षेत्र में लगभग 70 से अधिक अवैध कालोनियां विकसित हो चुकी हैं जिससे मकान के नक्शे पास करने के नाम पर होने वाली सरकार की आय को भारी नुकसान पहुंचा है और भूमि की रजिस्ट्री ना होने के कारण भी स्टांप (पेरीफेरी एक्ट) ड्यूटी के नाम पर सरकार को प्रति माह करोड़ों रुपए की चपत लग रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में हरियाणा सरकार (पेरीफेरी एक्ट) ने पिंजौर, कालका एवं आसपास की पंचायतों को नगर निगम पंचकूला से अलग कर नगर परिषद कालका क्षेत्र घोषित कर दिया था लेकिन वर्ष 2020 में अर्बन एक्ट की धारा 7ए लगाकर शहरी क्षेत्र के विकास को रोक दिया है।
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