(सीएम मान ) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में दावा किया था कि राजस्थान सरकार पर पानी के बदले करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने कहा कि या तो यह पैसा दिया जाए, नहीं तो राजस्थान पानी लेना बंद करे।
इस मुद्दे को लेकर अब पंजाब और राजस्थान सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। पंजाब की इस मांग को राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। (सीएम मान ) वहीं, सीएम मान का कहना है कि यह पंजाब का हक है और इसे पाने के लिए वे कोर्ट का रुख करेंगे।
सीएम मान ने कहा कि जब किसी की गलती सामने आती है तो पहले वह इनकार करता है, लेकिन बाद में सच मानना पड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब अपने अधिकार के लिए अदालत में केस लड़ेगा और राजस्थान को भी वहीं अपनी बात रखनी चाहिए।
दूसरी तरफ, राजस्थान के मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस मुद्दे को राजनीति से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि पंजाब में चुनाव करीब हैं, इसलिए यह मामला उठाया जा रहा है। (सीएम मान ) उन्होंने साफ किया कि सतलुज नदी के पानी पर किसी तरह की रॉयल्टी देने का सवाल ही नहीं बनता।
रावत ने बताया कि सतलुज नदी को लेकर शुरुआती समझौते 1920 के दशक में बीकानेर रियासत और पंजाब के बीच हुए थे, जब देश पर ब्रिटिश शासन था। (सीएम मान ) 1947 के बाद भी केंद्र सरकार की मौजूदगी में कई समझौते हुए, लेकिन कहीं भी पानी पर रॉयल्टी का जिक्र नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रोजेक्ट का खर्च बांटना हो तो वह अलग बात है, लेकिन पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन पर रॉयल्टी मांगना सही नहीं है। पूरा मामला यह है कि सीएम भगवंत मान का कहना है कि पुराने समझौतों के आधार पर राजस्थान पानी ले रहा है, लेकिन जब भुगतान की बात आती है तो दूसरे समझौते का हवाला देता है। इसी वजह से पंजाब सरकार अब 1920 के समझौते की दोबारा समीक्षा कर बकाया राशि वसूलना चाहती है।
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