इलाहाबाद, 16 मार्च 2026 आवाज इंडिया टुडे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा नमाजियों की संख्या सीमित करने के आदेश को रद्द कर दिया है और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नमाज अदा करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस अतुल (इलाहाबाद हाईकोर्ट )श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन शामिल थे, ने डीएम और एसपी द्वारा जारी उस निर्देश को खारिज कर दिया जिसमें मस्जिदों में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित रखने की बात कही गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति नमाज के दौरान बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यह फैसला संभल निवासी मुनाजिर खान की याचिका पर सुनाया गया। इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई कानून-व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं हैं तो वे इस्तीफा दे दें या फिर अपना तबादला करवा लें।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह राज्य की जिम्मेदारी है कि हर समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा करने का अधिकार मिले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि धार्मिक कार्यक्रम किसी निजी स्थान पर हो रहा है तो उसके लिए राज्य से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। राज्य का हस्तक्षेप केवल तब आवश्यक होता है जब धार्मिक आयोजन सार्वजनिक स्थान पर किया जा रहा हो।
प्रशासन ने जारी किया था यह आदेश
संभल प्रशासन ने रमजान के दौरान मस्जिदों में एक समय में केवल 15 से 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति देने का निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ संभल के निवासी मुनाजिर खान ने 18 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
इस मामले की पहली सुनवाई 27 फरवरी को हुई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन की कड़ी आलोचना भी की थी। सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया।
सरकारी वकील की दलील (इलाहाबाद हाईकोर्ट)
सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि यह आदेश कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जारी किया गया था। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और प्रशासन का आदेश रद्द कर दिया।
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